Solar Panel क्या है – Solar कितने प्रकार के होते है

सोलर पैनल जिसे सौर उर्जा पैदा करने वाला पैनल भी कहते है यह सोलर सिस्टम कहलाता है। यह सिस्टम सूरज आने वाली रोशनी को डायरेक्ट DC वोल्टेज में तब्दील कर देता है जिसे की इन्वर्टर की मदद से हम AC करंट में तब्दील करके उपयोग में लेते है।

सोलर पैनल एक प्रकार का अल्मीनियम का फ्रेम होता है जिसमे सोलर सेल लगे होते हैऔर एक शीशे की परत होती है उन सेल की रक्षा के लिए इस प्रकार एक पैनल बना होता है। यह सौर पैनल लगभग 1V से लेकर 24V तक का होता है जिसे हम इस्तेमाल में लेते है।यह उपकरण सिर्फ और सिर्फ सूरज की रोशनी में काम करता है।

Solar Cell क्या है

सोलर सेल सोलर पैनल में पाया जान वाला एक उर्जा तब्दील करने वाला सेल है। जैसे की जब सूरज से सीधी रोशनी पैनल से सेल पे पड़ती है तब सेल सौर उर्जा को बिजली तिरंगे में बदल देता है। इसे सोलर सेल कहते है।

Solar Panel कितने प्रकार के होते है

सोलर पैनल दो प्रकार के होते है

  1. मोनोक्रिस्टल लाइन(Monocrystalline )
  2. पोलीक्रिस्टल लाइन(Polycrystalline)

Monocrystalline  सोलर पैनल

यह सोलर पैनल यह देखने में डार्क काळा रंग का होता है।अगर हम इसकी बनाबट की बात करें तो यह Solar Panel शुध्द सिलिकॉन मटेरियल से बने होते है यह अब तक का सबसे अच्छा मटेरियल है।यह पैनल बाकि पैनल से ज्यादा लगत के होते है। इस प्रकार से पैनल की उर्जा देने की क्षमता बहुत अच्छी होती है।

जैसे की किसी भी एरिया में जहा पर सूरज काम निकलता है और झा पर मौसम खराब रहता है जैसे बादल होते है तो यह इस प्रकार के इलाकों में भी बहुत अच्छा काम करते है। हलाकि मौसम बदलने से पावर कम देते है पर बाकि पैनल से अच्छा काम करते है।यह बाकि से इस लाई महंगा है इसमे लगने वाला मटेरियल अच्छा होता है और लम्बे समय तक टिकने वाला होता है।

अगर हम इसके काम करने की क्षमता को देखे तो यह लगभग 20 साल से भी आदिक काम कर सकता है इतने समय में इसका पावर कम हो जाता है फिर भी काम करता है।

अगर आपके एरिया में धुप अच्छी नहीं अति है और आपका बजट अच्छा है तो आप हमेसा मोनो सौर पैनल को हिओ लगवाए। अगर बाकि Solar Panel काम रोशनी में आपको 15V आउटपुट करंट दे रहे है तो मोनो आपको 20V के तक़रीबन आउटपुट वोल्टेज दे देगा।

सेंट्रल लॉकिंग सिस्टम क्या है-कैसे काम करती है

Polycrystalline  सोलर पैनल

यह पैनल Solar Panel का और प्रकार है। अगर आपका एरिया ऐसा है जहा पर धुप सूरज की रोशनी अच्छी अति है तो यह सोलर पैनल आपके लिए ही है। यह ऐसा पैनल है जिसको जितनी धुप मिलती है उतना यह आपको ओतना बिजली का उत्पादन देता है।

यर्ह पैनल असुद्धि सिलिकॉन मटेरियल से बना है इस में कम मात्रा में मिलाया जाता है सिलिकॉन। अगर आपके इलाके में बादल या मौसम खराब रहता है तो यह आपके लिए नहीं है।यह Solar Panel बजट में सस्ता होता है मोनो पैनल के मुकाबले।

अगर आपके घर में लगाना है और आपके घर की सत्त ज्यादा एरिया में है तो आप लगा सकते है ऐसा एस्लाई क्यूंकि यह ज्यादा एरिया लेता है।यह सोलर पैनल ज्यादा रोशनी मिलने पर भी बाकि सौर पैनल से काम उर्जा देता है क्यूंकि इसमे अच्छा मातेतीअल नहीं लगा होता है।

अगर हम इसकी जिंदगी की बात करें तो यह लगभग 15 से 20 साल तक काम कर सकता है। यह अपनी 80 प्रतिसत सकती पहले 10 सालो में आ जाता है।इसको पोलीक्रिस्टल लाइन Solar Panel कहा जाता है।

Solar Panel से क्या चल सकता है

अगर हम सौर उर्जा की बात करें तो इस से बहुत कलुष चल सकता है। पैनल हमें DC वोल्टेज देते है जिसे हम डायरेक्ट करंट कहते है इस करंट से केवल हम DC उर्जा से चलने वाले सोरोत चला सकते है जैसे की DC Fan ,DC Light अदि।

अगर आपको ऐसे उपकरण जैसे की कूलर ,टीवी ,पंखा,फ्रिज अदि चलना है तो आपको इस के लिए एक इन्वर्टर की आबश्यकता होगी। इन्वर्टर जो की ac करंट को DC करंट में तब्दील कर देता है।

सोलर इन्वर्टर क्या होता है

सोलर इन्वर्टर पैनल से आने वाली Dc उर्जा को ac करंट में तब्दील करने वाला उपकरण है। हमारे घरो में इस्तेमाल होने वाली बिजली अल्टेरनेटिंग करंट होता है जो की 220V वोल्टेज होता है।अगर हम सौर पैनल की बात करें तो यह 12V डायरेक्ट करंट देता है इस वोल्टेज से कोई भी उपकरण नहीं चल सकता इस लिए इन्वर्टर की आबश्यकता होती है। इन्वर्टर 12V करंट को 220V में कर देता है। इसको सोलर पैनल कहते है।

Solar Panel कितने वाट का होता है

सोलर पैनल 10W से लेकर 500W तक का होता है जो की इस्तेमाल होता है। सोलर पैनल की क्षमता उसके लगते बकत जरुरत को देखते हुए की जाती है। जितनी जरुरत है उतने वाट का ही सोलर सिस्टम लगाया जाता है।

Solar System कितने प्रकार का होता है

सोलर सीटें दो प्रकार का होता है

  1. ऑफ-ग्रिड(Off Grid)
  2. ऑन-ग्रिड(On Grid)

ऑन-ग्रिड(On Grid)

ऑन-ग्रिड ऐसा सोलर सिस्टम है जिसमे आप अपने घर या फैक्ट्री में सौर पैनल होते हुए भी ग्रिड से बिजली लेते हो। इस इस लाई है क्यूंकि इस सिस्टम के दौरान एक स्पेशल किसम का मीटर जिसे बिदिरेक्शनल मीटर लगाया जाता है।

इस सिस्टम में आप डायरेक्ट ग्रिड से बिजली लेते हो और जो बिजली सोलर सिस्टम द्वारा बनायीं जाती है उसको आप इस मीटर के जरिये सरकार को बापिस बेच सकते हो। यह सबसे अच्छा तरीका है सौर पैनल लगवाने का। इस में आपको किसी भी प्रकार की बैटरी लगवाने की कोई जरुरत नहीं है।

यह सिस्टम सोलर इन्वर्टर से पैदा होने वाली बिल्जी मीटर के जरिये बापिस दे देता है। उदाहरण के तोर पर जैसे अपने एक महीने में कुल 500 यूनिट बिजली खर्च किया और अपने सोलर सिस्टम ने कुल 400 यूनिट बिजली बनाया तो आपको सिर्फ 100 यूनिट बिजली का बिल ही देबा पड़ेगा।अगर आपके एरिया में बिजली अच्छी रहती है तो ही आप इस सिस्टम को लगवाए बरना आपको नुकसान भी हो सकता है।

ऑफ-ग्रिड(Off Grid)

यह ऑफ-ग्रिड सिस्टम ऐसा जिस में आपको सोलर सिस्टम के साथ बैटरी की जरुरत होती है। इस में ऑन ग्रिड की तरह आप बिजली सरकार को नहीं बहते हो इस में आप बिजली अपने लिए बनाते हो। सोलर पैनल को सोलर इन्वर्टर के साथ जोड़ा जाता है।

यह इन्वर्टर सोलर से आने वाली डायरेक्ट करंट को अल्टेरनेटिंग करंट में तब्दील कर देता है। जिस से आप अपने घर में सब उपकरण को चला सकते हो। इस ग्रिड में बहुत साडी बैटरी की आबश्यकता होती है। यह बैटरी दिन भर में सोलर पैनल द्वारा चार्ज की जाती है और रात को बैकअप देने के लिए इस्तेमाल में ली जाती है।

इस सिस्टम का बहुत फयदा नहीं होता है इसका बहा पर फयदा होता है जहा पर ग्रिड की बिजली बहुत कम अति है। इसको ऑफ ग्रिड सिस्टम कहते है।

Solar Panel के फयदे

  1. आप बिना किसी ग्रिड के बिजली उत्पाद कर सकते है।
  2. काम खचे में ज्यादा बिजली मिलती है।
  3. एक बार पैसा लगा कर 25 साल तक बिल मुकत हो सकते हो।
  4. रक्षा करने में काम खर्चा आता है।
  5. खराब मौसम में भी काम करता है लेकिन कम काम करता है।

Solar Panel के नुकसान

  1. मौसम खराब होने पर बिजली काम देता है।
  2. लगवाने का खर्चा बहुत होता है।
  3. सोलर उर्जा को सँभालने के लिए बैटरी की आबश्यकता रहती है।
  4. आपके घर की ज्यादा जगा घेर लेता है।
  5. इस पर आप ज्यादा लोड नहीं लगा सकते अपने सिस्टम मुताबिक लोड लगा सकते हो।

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