MSP और APMC बारे में पूरी जानकारी 2021

MSP का पूरा नाम न्यूनतम समर्थन मूल्य(Minimum support price)है। यह भारत सरकार द्वारा किसानो के लिए कृषि कानून बनाया गया जिसे किसान अपनी फसल को सही दाम पर बेच सके। ऐसे CACP (Commission for Agricultural Costs and Prices
) तेह करती है की किसी भी अनाज का कितना MSP होना चाहिए,इसके बताये गए मुल्ये पर ही सरकार फसलों का मुल्ये तय करती है.इसे लागु होने से किसान अपनी फसल को पूरे देश में जा कर कही भी बेच सकता है , सरकार का मानना है की किसानो की फसल का अच्छा दाम मिले और फसल उगने से पहले ही दाम तय हो जाये इस लई MSP का निर्माण हुआ है.यह लगभग 26 फसलों पर लागु होता है।

MSP कैसे त्यार किया जाता है?

MSP को पूरे सोच समाज से बनाया जाता है। इसमें देखा जाता है की राज्ये सरकार में कितने लोग खेती करते है और खेती करने के लिए किसानो के पास मेचिन्स है या नहीं। किसान खेती के लिए लोन ले रहा है या नहीं। किसान के पास जमीन किराये पर है या नहीं यह सब कुश देखते हुए ही यह सब कानून बनाये गये है.

CACP यह सब देखने के बाद कंट्रोल सरकार को बताती है की MSP को लागु करना चाहिए या नहीं। अगर किसी राज्ये में किसी अन्य फसल जैसे की गेहू और मक्का की फसल बहुत ज्यादा मात्रा में होती है , तो यह देखा जाता है की इस फसल को किसान किसी और राज्ये में बेच सकता है या नहीं यह सब फैसले लेने के बाद यह कणों बनता है।

MSP तैयार करने में क्या समस्या आती है?

MSP को तैयार काने से पहले देखा जाता है की कणों ऐसा बने की किसान को कोई भी समस्या ना होने चाहिए। भारत में लगभग 70 प्रतिसत लोग खेती करते है , यह सब करते हुए देखा जाता है की कोनसी फसल कोनसे राज्ये में कितनी महंगी है क्या मुल्ये है ,

एक फसल को दूसरे राज्ये में जाने के बाद किसान को क्या रेट देता पड़ेगा CACP यह सब अपना हिसाब लगा लेती है फिर कानून बनती है। तो इस प्रकार की समस्या आती है।

MSP से किसानो का क्या फयदा है?

अगर MSP के फयदे की बात करे तो इसके फयदे भी अच्छे है , जब किसान अपनी फसल जैसे की गेहू को बहने जाता है तो उसे बहुत प्रकार के मुल्ये से बेचा जाता है किसी का काम और ज्यादा मुल्ये में ,कुश बियापारी ऐसा करते है की फसल और अपने काम दाम में खरीद लेते है जिसमे किसान को घाटा होता है.

इस कम मुल्ये में खरीदने वालो के सरकार ने MSP का निर्माण किया है ,इसमें सर्कार फसल का एक रेट तय करती है की इस रेट से कम नहीं लेनी और इस से ज्यादा रेट से फसल ले सकता है। जैसे उदाहरण के तोर पर सरकार ने गेहू का मुल्ये 1500 प्रति कुएंटल कर दिए है MSP में कोई भी बियापारी इस मुल्ये से कम गेहू को नहीं खरीद सकता और इस रेट से ज्यादा रेट से ले सकता है.

जब अनाज बहुत ज्यादा हो जाता है बियापारी नहीं खरीद ते है तो सरकार क्या करती है की इस रेट पर सब अनाज को खरीद लेती है। बाद में इस अनाज को सस्ते दामों पर गरीबो को दे देती है। यह कुश फयदे है।

MSP को लेकर किसान आंदोलन क्यों कर रहे है?

सरकार के इस फैसले से पंजाब और हरयाणा के साथ साथ बहुत राज्ये के किसान खुश नहीं है। उनका मानना है की यह 3 कणों आने के बाद MSP ख़तम हो जाएगी.

इसके साथ किसानो को लगता है की APMC मंडीया बंद हो जाएगी जैसे की मस्प के जाने के बाद बियापारी डायरेक्ट किसानो से अनाज लेने लग जायेगे और मंडी में कोई भी किसान नहीं बेचेगा और उसके बाद मंडी बंद होने के बाद बियापारी उन किसानो को जो ज्यादा रेट से बेच रहे थे बिआपारी कम रेट में खरीदेंगे।

APMC क्या है?

APMC का पूरा नाम है (Agricultural Produce Market Committee)है। 2020 कृषि कणों लागु होने के बाद APMC बहुत चर्चा में है ,हम आपको इसके बारे में बतायेगे। यह एक प्रकार का बोड है जो सरकार द्वारा बनाया गया है इसको मार्केटिंग के तोर पर बनाया गया है.

यह किसानो के लिए बनाया गया है इसमें किसानो को अपनी फसलों को बेचने के लिए बनाया गया है। किसान को अपनी फसल बेचने के लिए कही भी जाना नहीं पड़ेगा बह अपनी फसल को सरकार द्वारा बनाये गए APMC यानि मंडी में बेच सकता है। यह किसानो को होने वाली हर समस्या से बचता है। इसे APMC कहते है ,

  • किसानो का और मानना है की इन कानून आने के बाद कॉन्ट्रेक्ट फार्मिंग हो जाएगी मतलब बियापारी उनके साथ कॉन्ट्रेक्ट कर लेंगे की हमें फसल चाहिए कोई फयदा या नुक्सान होगा तो यह किसान का होगा। किसानो को इस बात का ही दर है। कॉन्ट्रेक्ट फार्मिंग अच्छी बात भी है और अच्छी बात नहीं भी है।
  • ऐसे होने से किसनो के लिए रसन की दुआने बंद हो जाएगी क्यूंकि एक बड़ा बियापारी सस्ता अनाज खरीदने के बाद उसके दुकानों में नहीं बेचेगा बह उसको अपने माल बनाकर उसमे महंगे मुल्ये में बेचेगा। किसनओ को इस बात का दर है और बह किसान इस बात से आंदोलन कर रहे है।
  • किसानो को लगता है की यह कानून होने के बाद कालाबाजारी बढ़ जाएगी ऐसा इस लिए है की किसनओ से साडी अनाज बियापारी खरीदेगा ना की सरकार ऐसा होने पर बियापारी कालाबाजारी करेगा जिस से बाजार में अनाज की कमी होगी जिस से बियापारी उस अनाज को महंगे डैम पर बेचेगा।

कृषि बिल का मतलब क्या है?

इस बिल का मतलब यह है की किसान अब अपनी फसल को मंडी यानि APMC के इलावा कही भी बेच सकता है ,चाहे कोई भी संस्था हो
बियापारी हो मंडी में कही भी बेच सकता है। इस बिल का सीधा सा मतलब एहि है।

किसान के तीन कानून क्या है?
किसानो के यह 3 कानून है,
1 आवश्यक वस्तु (संशोधन) 2020
2 कृषि उपज व्यापार एवं वाणिज्य (संवर्धन एवं सुविधा) 2020
3 कीमत आश्वासन एवं कृषि सेवाओं पर करार (सशक्तिकरण एवं संरक्षण) 2020

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