मोबाइल स्विचन सेण्टर क्या होता है ?

Mobile Switching Center जिसे MSC भी कहा जाता है।यह एक प्रकार का मोबाइल संचार में इस्तेमाल में होने वाला नेटवर्क है। यह केंद्र बहुत सारे BSC जिसे हम (बेस स्टेशन कंट्रोलर) कहते है .इसके साथ जुड़ा होता है।मोबाइल स्विचिंग केंद्र अपने एरिया में होने वाली सभी कॉल को संभालता है की कोनसी कॉल कहा से आ रही है और किस कॉल को कहा पर भेजना है।यह एक मात्र टेलीफोन एक्सचेंज की तरह काम करता है।

मोबाइल स्विचिंग केंद्र हर एक टेलीकॉम कंपनी का अपना अपना होता है ऐसा इस लिए होता है क्यूंकि हर टेलीकॉम कंपनी की कॉल आपस में दखल अंदाज ना हो। इसको मोबाइल स्विचिंग सेंटर कहते है।

Mobile Switching Center कैसे काम करता है

इसका काम करके का तरीका बहुत अलग है। जो मोबाइल स्विचिंग केंद्र होता है बह इस प्रकार से जुड़े होते है जैसे आपको निचे बताया गया है:-
MSC (मोबाइल स्विचिंग सेंटर) – BSC (बेस स्टेशन कंट्रोलर) – BTS (बेस स्टेशन) – MS (मोबाइल कंट्रोलर)

यह सारा नेटवर्क इस तरह काम करता है। जब मोबाइल फ़ोन के जरिये आप किसी को कॉल करते है तो कॉल सबसे पहले (BTS) के पास चली जाती है यह मोबाइल का टावर होता है जो की मोबाइल को नेटवर्क देता है। इसके बाद हमारी कॉल इस से होकर (BSC) के पास चली जाती है है जो की टावर्स का कंट्रोलर होता है।

यह कंट्रोलर एरिया के सभी प्रकार के टावर को संभालता है जो एक प्रकार के एरिया में काम करते है। उसके बाद कॉल (MSC)के पास चली जाती है जिस से मोबाइल स्विचिंग केंद्र देखता है की कॉल को किस टावर पर भेजना है ऐसी तरह यह सारा प्रोसेस काम करता है।

यह सरा प्रोसेस होने के बाद आखिर में कॉल दूसरे इन्सान के पास चली जाती है। यह सरा काम होने में केवल बहुत काम समां लगता है जैसे की कुश ही सेकंड। इस से यह पता चलता है की हमारा संचार सिस्टम बहुत ही तेज गति से काम करता है।

इलेक्ट्रोमैग्नेटिक स्पेक्ट्रम क्या है

मोबाइल टावर से लेकर मोबाइल स्विचिंग केंद्र तक का सफर ऑप्टिकल फाइबर के जरिये किया जाता है। यह संचार की स्पीड बहुत तेज होना ऑप्टिकल फाइबर की मदद से है। फाइबर केबल को मोबाइल टावर के साथ जोड़ा जाता है। अक्सर हमको लगता है की मोबाइल टावर एक दूसरे के साथ जुड़े होते है .

यह सच है लकिन यह झूट भी है ऐसा इस लाई क्यूंकि मोबाइल का टावर को बीएससी से जोड़ने के लिए एक नेटवर्क की जरुरत है जो की फाइबर से किया जाता है ऐसा पूरी तरह वायरलेस इस लिए नहीं है क्यूंकि कुश समय बाद नेटवर्क की क्षमता काम हो जाती है इस लाई जोड़ा जाता है।

Mobile Switching Center कितने प्रकार का होता है

दर्शल Mobile Switching Center की कोई भी प्रकार नहीं होती है। जैसे की भारत सरकार द्वारा हर एक राज्ये का एक मोबाइल स्विचिंग केंद्र होना चाहिए सिर्फ एक कंपनी का अगर किसी भी टेलीकॉम कंपनी का यूजर बहुत ज्यादा है तो मोबाइल स्विचिंग केंद्र की संख्या ज्यादा भी हो सकती है।

जैसे की हम एक राज्ये से दूसरे राज्ये तक जाते है तो जाते ही हमारा मोबाइल फ़ोन दूसरे राज्ये में रोमिंग में चला जाता है ऐसा इस लाई होता है क्यूंकि बह मोबाइल फ़ोन दूसरे राज्ये के Mobile Switching Center से रेजिस्टर्ड है। एक से दूसरे राज्ये से जाने से रोमिंग हो जाता है जो बताता है की आप दूसरी जगह पर हो।

सभी देश के Mobile Switching Center आपस में जुड़े होते है ऐसा इस लाई क्यूंकि यूजर कभी भी किसी भी बकत किसी दूसरी कंपनी के यूजर को कॉल लगा सकता है इस टाइम पर यह मोबाइल स्विचिंग केंद्र काम में आता है।

जैसे की आप किसी मोबाइल स्विचिंग केंद्र में अपना नंबर रजिस्टर करवाते हो तो आपको एक अलग तरह का नंबर मिलता है जिसको मोबाइल नंबर के नाम से जाना जाता है। Mobile Switching Center में कस्टमर की साडी जानकारी होती है जैसे की कस्टमर का नाम ,पता अदि।
ऐसा इस लाई कई बार सर्कार मोबाइल कंपनी से किसी भी बियक्ति की जानकारी मांग सकती है और उनकी देनी पड़ती है।

इस सब को ही Mobile Switching Center कहा जाता है।सब टावर अपनी अपनी कंपनी के मोबाइल सेंटर के साथ जुड़े होते है केबल के जरिये क्यूंकि ऐसा करने से यूजर को किसी भी प्रकार की प्रॉब्लम ना आये।

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