Battery Management सिस्टम क्या है? – BMS कैसे काम करता है?

Battery Management System इस प्रकार के सिस्टम लिथियम बैटरी में इस्तेमाल किये जाते है।एक BMS के अंदर बहुत सारी मॉस्फेट और आई सी लगी होती है यह आई सी इसके बिचले करंट और वोल्टेज को कण्ट्रोल करती है और साथ में मॉनिटर भी करती है।यह सिस्टम को ज्यादा बड़ा सिस्टम नहीं है दरअसल यह एक प्रकार का पीसीबी बोर्ड है जिसमे इलेक्ट्रॉनिक के कॉम्पोनेन्ट लगे होते है। जब बैटरी को कटऑफ करना होता है.

तब इसमे लगी मॉस्फेट काम में आती है। जब बैटरी की वोल्टेज सेफ लेवल से ऊपर जा निचे चली जाती है तो BMS उसे एक फ्यूज की तरह कटऑफ कर देता है और बैटरी की वोल्टेज सेफ सामान्य होने के बाद फिर से बैटरी से पावर लेना शुरू कर देता है।

Battery Management System को बैटरी में लगाना जरुरी है क्या ?

बैटरी मैनेजमेंट सिस्टम लगाना जा नहीं लगाना आपकी मर्जी है। जैसे की छोटे प्रोजेक्ट्स जिसमे आप बैलेंस्ड चार्जर इस्तेमाल करते है इसमे bms की आबश्यकता कम है।

अगर जैसे की बड़े प्रोजेक्ट्स कार की बैटरी ,और इ – बाइक की बैटरी बना रहे है तो आपको bms लगाना बहुत ही जरुरी है क्यूंकि मोटर का करंट बहुत चला जाता है इस से बैटरी आउट ऑफ़ रेंज चली जाती है और सभी सेल की वोल्टेज बराबर न होने से बैटरी खराब भी हो सकती है।

और अगर अप्प लोड ज्यादा दाल दे और आपकी बैटरी न उठा सके इस किस्म में आपको bms की आबश्यकता है।

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रेटिंग ऑफ़ बैटरी मैनेजमेंट सिस्टम

बैटरी मैनेजमेंट सिस्टम में ज्यादातर 2 प्रकार की रेटिंग होती है।

  • सीरीज (S) रेटिंग
  • करंट रेटिंग

सीरीज (S) रेटिंग

इसमे ऐसा है की आप सीरीज में कितने सेल लगा सकते हो मतलब सीरीज में सेल (Cell) की संख्या जितनी ज्यादा होगी उस के हिसाब से आपको बैटरी मैनेजमेंट सिस्टम लगाना होगा।

करंट रेटिंग

इसका मतलब ऐसा है की बैटरी मैनेजमेंट सिस्टम मैक्सिमम लोड को या फिर बैटरी के चार्जिंग टाइम पर कितना करंट दे सकता है इसको ही करंट रेटिंग कहा जाता है।

Battery Management System बैटरी के साथ कैसे जोड़े

अगर अपने बैटरी मैनेजमेंट सिस्टम को बैटरी के साथ जोड़ना है तो आपको पहले बैटरी की कॉन्फ्रिगेशन के आकर का बैटरी मैनेजमेंट सिस्टम लेना होगा जो सही काम करें। इसमे चार साइड होते है।

अगर हम 12V की बैटरी की बात करें तो इसमे एक तो 0V ,4V ,8V और 12V के पॉइंट होंगे जिस से अप्प बैटरी मैनेजमेंट सिस्टम को जोड़ेगे। बैटरी को जोड़ने से पहले आप को सभी सेल(Cell) को सीरीज में जोड़ना होगा। इस प्रकार आप जोड़ सकते है।

लिथियम आयन बैटरी पैक कैसे बनाये

लिथियम आयन बैटरी पैक बनाने के लिए आपको लिथियम आयन सेल्स(Cells)की आबश्यकता है जिस से आप बैटरी पैक बनाओगे। आपको पिछले पैराग्राफ में बताया गया है.की बैटरी मैनेजमेंट सिस्टम बैटरी के साथ कैसे जोड़े अप्प पढ़ सकते हो।

इसके बाद आपको जितनी जर्रूरत है उसके मुताबिक सरे सेल्स को सीरीज में जोड़ना होगा फिर सोल्डरिंग के जरिये या फिर स्पॉट बैल्डिंग के जरिये साडी बैटरी को आपस में जोड़ कर लिथियम आयन बैटरी पैक त्यार हो जायेगा।

ई-वाहन में कोनसी बैटरी इस्तेमाल होती है

अगर हम ई वाहन की बात करें तो इसमे लिथियम आयन टेक्नोलॉजी इस्तेमाल होती है।लिथियम आयन सेल(Cell)के समूह को जोड़ कर एक बहुत बड़ी बैटरी बनायीं जाती है।

यह बैटरी इस ले लगायी जाती है इसमे लीड एसिड बैटरी के मुकाबले बहुत ज्यादा पावर होती है और लीड एसिड बैटरी के मुकाबले ज्यादा समा चलती है।

पहले लिथियम आयन की जगह लेडऐसी बैटरी इस्तेमाल होती थी जिस से बहन की लाइफ काम होती थी। इस ले ई वाहन में इस बैटरी का उपयोग होता है।

लिथियम आयन 18650 बैटरी क्या है

यह 18650 लिथियम आयन टेक्नोलॉजी की बैटरी है। यह बैटरी लिथियम से बनती है जो की बहुत अच्छी बैटरी होती है। इस बैटरी को जॉन गूदेनौघ(John Goodenough) द्वारा बनायीं गयी है.

जो की प्रोफेस्सर है ऑक्सफ़ोर्ड यूनिवर्सिटी में। यह बैटरी आज तक की सबसे अच्छी बैटरी मानी गयी है इसका इस्तेमाल भी बहुत जगह होने लगा है। आज कल ई-बाहन में भी इस टेक्नोलॉजी का प्रयोग होने लगा है।

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